प्री-वेडिंग शूट शादी से हफ्तों या महीनों पहले होने वाला अलग शूट है, जिसमें कैमरे के सामने सिर्फ आप दोनों होते हैं। छोटा जवाब: इसे शादी से 2 से 4 महीने पहले रखिए और कार्ड प्रिंट होने से पहले ही करा लीजिए; दिन कोई वर्किंग डे चुनिए और शुरुआत सूरज ढलने से करीब डेढ़ घंटा पहले रखिए। 2 से 4 घंटे, एक लोकेशन और एक-दो आउटफिट का हिसाब रखिए। सबसे बड़ा फायदा तस्वीरें नहीं हैं: शादी का दिन कैमरे के सामने खड़े होने का आपका पहला दिन नहीं रहेगा।
प्री-वेडिंग शूट की असली वजह क्या है?
तीन ठोस वजहें हैं, और "फोटो अच्छी आएगी" उनमें से एक नहीं है। पहली वजह रिहर्सल है। ज्यादातर जोड़ों के लिए शादी का दिन ही प्रोफेशनल कैमरे के सामने पहला दिन होता है, और वह दिन दोबारा नहीं आता। शूट में आप सीख जाते हैं कि कैसे खड़े होना है, चेहरे का कौन सा हिस्सा आपको पसंद है, और डायरेक्शन मिलने पर आपकी प्रतिक्रिया कैसी होती है।
दूसरी वजह यह है कि तस्वीरें शादी से पहले ही काम आती हैं। कार्ड, save the date, शादी की वेबसाइट, एंट्री पर लगने वाला वेलकम बोर्ड, संगीत में चलने वाला फोटो-वीडियो मोंटाज और बाद के थैंक-यू कार्ड — इन सबको शादी से पहले तस्वीर चाहिए। शादी की फोटो आने तक यह सारा काम कब का निपट चुका होता है।
तीसरी वजह फोटोग्राफर के साथ तालमेल जाँचना है। दो घंटे में वह चीज दिख जाती है जो पोर्टफोलियो नहीं दिखाता: रफ्तार, बात करने का तरीका, डायरेक्शन देने की भाषा। अगर फोटोग्राफर तय नहीं हुआ है तो पूरी कसौटी और सवाल हमारी फोटोग्राफर चुनने की गाइड में हैं।
कब कराना चाहिए?
तारीख शादी से नहीं, प्रिंटिंग की डेडलाइन से तय होती है। अगर तस्वीरें कार्ड या save the date पर जानी हैं तो शूट प्रिंट से कम से कम तीन हफ्ते पहले होना चाहिए — एडिट की हुई फोटो आम तौर पर दो से चार हफ्ते में मिलती हैं।
- शादी से दूरी: 2 से 4 महीने। बहुत पहले कराने पर बाल या वजन बदल जाने से तस्वीरें पुरानी लगने लगती हैं; बहुत देर करने पर प्रिंटिंग का शेड्यूल छूट जाता है।
- दिन का समय: सूरज ढलने से करीब डेढ़ घंटा पहले शुरू कीजिए। इस विंडो में रोशनी नरम होती है, सख्त परछाई खत्म हो जाती है और कोई आँखें नहीं सिकोड़ता।
- हफ्ते का दिन: वर्किंग डे। मशहूर किला, बाग या लेकफ्रंट शनिवार शाम को भरा रहता है और गुरुवार शाम लगभग खाली।
- मौसम: अक्टूबर से फरवरी सबसे भरोसेमंद है। मॉनसून में लोकेशन का भरोसा नहीं रहता, और मई-जून की दोपहर में आउटडोर शूट टिक ही नहीं पाता।
- बैकअप तारीख: बारिश के लिए दूसरी तारीख बुकिंग के वक्त लिखवाइए, बारिश वाले दिन नहीं।
कहाँ कराएँ: लोकेशन और परमिशन
अच्छी लोकेशन तीन चीजें एक साथ देती है: दो-तीन अलग बैकड्रॉप, छाया की जगह, और आना-जाना जो रोशनी का वक्त न खा जाए। जो जगह एक फ्रेम में शानदार लगती है पर दूसरा एंगल नहीं देती, वह एक घंटे बाद दोहराने लगती है।
- ऐसी जगह जिसका आपसे रिश्ता हो — जहाँ पहली बार मिले थे वह कॉलेज, पहली डेट का कैफ़े, दादा-दादी का घर। कहानी अपने आप बन जाती है।
- प्रकृति — झील का किनारा, जंगल का रास्ता, खेत, समुद्र तट। रोशनी सबसे अच्छी, कंट्रोल सबसे कम: हवा और मच्छर असली जोखिम हैं।
- शहर — पुरानी गलियाँ, पुल, इंडस्ट्रियल लुक। दिक्कत भीड़ है; हल वर्किंग डे की सुबह है।
- स्टूडियो — जब मौसम का दखल बिलकुल नहीं चाहिए या प्राइवेसी मायने रखती है। रोशनी पूरी तरह कंट्रोल में रहती है।
- शादी वाले वेन्यू का लॉन — तस्वीरें भी मिलती हैं और उसी वक्त की रोशनी भी देख लेते हैं।
परमिशन वाला हिस्सा मत छोड़िए: संरक्षित स्मारक, किले, महल, म्यूजियम, नैशनल पार्क और कई शहरी बाग प्रोफेशनल कैमरे वाले शूट को कमर्शियल शूट मानते हैं — इसके लिए पहले से अनुमति और अक्सर अलग फीस लगती है, जो आम एंट्री टिकट से अलग होती है। फोटोग्राफर को अपनी नियमित लोकेशनों के नियम आम तौर पर पता होते हैं, लेकिन बुकिंग पक्की कराना जोड़े का काम है। गेट पर रोक दिए जाने का मतलब है वह एकमात्र शाम गँवा देना जो आपने प्लान की थी।
प्री-वेडिंग शूट का असली नतीजा एल्बम नहीं, रिहर्सल है: शादी से पहले यह पता होना कि आप और आपका फोटोग्राफर साथ कैसे काम करते हैं। इसलिए इसे "ट्रायल" की तरह नहीं, असली रिहर्सल की तरह प्लान कीजिए।
क्या पहनें, क्या साथ रखें?
कपड़ों का एक ही नियम है: लोकेशन सादी हो तो आउटफिट बोल सकता है, लोकेशन भरी-भरी हो तो आउटफिट चुप रहे। दोनों के लुक को मिलाइए पर एक जैसा मत पहनिए — एक ही पैलेट के दो शेड सबसे सुरक्षित फॉर्मूला है।
- दो आउटफिट काफी हैं: एक ट्रेडिशनल या फॉर्मल, एक कैजुअल। तीसरे का मतलब है आधा शूट कपड़े बदलने में जाना।
- जूते जमीन देखकर चुनिए। घास और रेत हील निगल जाती है; एक आरामदायक दूसरी जोड़ी साथ रखिए।
- एक छोटा बैग: टच-अप का मेकअप, हेयर पिन, वेट वाइप्स, दाग हटाने वाला पेन, सुई-धागा, पानी।
- एक प्रॉप कहानी बना देता है: चादर, साइकिल, फूलों का गुच्छा, आपका पालतू।
- शूट से एक दिन पहले नया फेशियल या नया हेयर कलर मत आजमाइए।
बुकिंग से पहले फोटोग्राफर से पूछिए
- प्री-वेडिंग शूट शादी के पैकेज में शामिल है या अलग से चार्ज होगा?
- कितने घंटे, कितनी लोकेशन और कितने आउटफिट चेंज? लोकेशन बदलने में लगने वाला समय घंटों में गिना जाएगा?
- कितनी एडिटेड फोटो मिलेंगी और डिलीवरी में कितना समय लगेगा?
- जो फोटो सेलेक्ट नहीं हुईं, वे देख सकते हैं? (ज्यादातर फोटोग्राफर नहीं देते — यह पहले से जान लेना बेहतर है।)
- बारिश हो जाए या हममें से कोई बीमार पड़े तो? रीशेड्यूल की शर्त क्या है?
- फोटो कार्ड, वेबसाइट और सोशल मीडिया पर इस्तेमाल कर सकते हैं? फोटोग्राफर इन्हें अपने प्रचार में लगाएगा?
ये तस्वीरें आखिर कहाँ काम आएँगी?
प्री-वेडिंग शूट की कीमत तब वसूल होती है जब तस्वीरें शादी से पहले काम करने लगें। save the date कैसे बनता है, यह हमने एक अलग लेख में समझाया है; प्री-वेडिंग की तस्वीरें उसी कार्ड का सही मसाला हैं।
- शादी का कार्ड और save the date
- शादी की वेबसाइट और डिजिटल इनवाइट का पहला स्क्रीन
- एंट्री का वेलकम बोर्ड और सीटिंग प्लान का डिजाइन
- संगीत या रिसेप्शन में चलने वाला फोटो मोंटाज
- आपके साझा एल्बम की पहली तस्वीरें
आखिरी बात किसी के दिमाग में शायद ही आती है: जिस साझा एल्बम में आप मेहमानों की खींची तस्वीरें इकट्ठा करते हैं, उसकी शुरुआत प्री-वेडिंग शूट से हो सकती है। एल्बम QR कोड से खुलता है, इसलिए मेहमान कोई ऐप डाउनलोड किए बिना फोटो अपलोड करते हैं — और शूट से लेकर आखिरी डांस तक सब कुछ एक ही जगह रहता है। एल्बम कुछ मिनटों में बन जाता है, और जब फाइलें जमा होने लगें तो फोटो छाँटने और संभालने की गाइड आगे का काम आसान कर देती है।
निष्कर्ष
शूट दो सवालों से प्लान कीजिए: इन तस्वीरों का इस्तेमाल कहाँ करूँगा, और वह चीज कब प्रिंट में जाती है? जवाब से तारीख निकल आती है। बाकी सब रोशनी और लोकेशन का हिसाब है — सूरज ढलने से डेढ़ घंटा पहले, वर्किंग डे पर, ऐसी जगह जिसकी परमिशन पक्की हो, और दो आउटफिट। जो जोड़े पहले रिहर्सल कर लेते हैं, वे शादी के दिन कैमरे की तरफ नहीं, एक-दूसरे की तरफ देखते हैं — और यह तस्वीरों में साफ दिखता है।
