छोटा जवाब: बैकअप प्लान छतरियां खरीदने से नहीं बनता, वेन्यू के कॉन्ट्रैक्ट में लिखे एक क्लॉज़ से बनता है। अगर फेरे या रिसेप्शन खुले में है तो तीन चीज़ें लिखित होनी चाहिए: उसी जगह पर उतनी ही कैपेसिटी वाला कवर्ड एरिया, फैसला कौन लेगा और कितने घंटे पहले, और मेहमानों को किस चैनल से खबर दी जाएगी। इन तीन के बिना आपके पास प्लान बी नहीं, सिर्फ़ अच्छे मौसम की उम्मीद है। नीचे यही तीन चीज़ें, फैसले का समय तय करने का तरीका, और यह बात कि बारिश फोटो के लिहाज़ से नुकसान नहीं है।
बैकअप प्लान क्या है, क्या नहीं
वेन्यू देखते समय "बारिश हो गई तो?" का सबसे आम जवाब होता है "अंदर शिफ्ट कर देंगे"। यह इरादा है, प्लान नहीं। असली बैकअप प्लान में यह सब तय होना चाहिए:
- उतनी ही कैपेसिटी: क्या वैकल्पिक हॉल सारे मेहमानों को बैठा सकता है या आधे खड़े रह जाएंगे? कमरा दिखवाने के बजाय लोगों की संख्या लिखवाइए।
- शिफ्ट करने का समय: बदलाव में कितने मिनट लगते हैं? 30 मिनट से ऊपर सब कुछ टाइमलाइन खिसका देता है और वेन्यू की क्लोज़िंग टाइम खा जाता है।
- काम किसका: कुर्सियां, साउंड और फूल कौन हटाएगा — वेन्यू की टीम या डेकोरेटर? नाम और आदमियों की संख्या के साथ तय कीजिए।
- अतिरिक्त खर्च: कवर्ड एरिया, एक्स्ट्रा स्टाफ और टेंट अलग से चार्ज होंगे? अगर रकम कॉन्ट्रैक्ट में नहीं है तो उसी दिन मोलभाव होगा और महंगा पड़ेगा।
- बिजली और साउंड: वैकल्पिक जगह में डीजे या बैंड के लिए ज़रूरी पॉइंट और स्पीकर की जगह है? अंदर साउंड की सीमा अक्सर अलग होती है।
अगर वेन्यू तय नहीं हुआ है तो ये सवाल पहली विज़िट में ही पूछ लें — पूरी लिस्ट शादी का वेन्यू कैसे चुनें में है। खुले में होने वाले फंक्शन की बाकी बातें आउटडोर शादी प्लानिंग गाइड में हैं।
टेंट, शामियाना या छतरी?
तीनों एक काम नहीं करते। जिस टेंट के साइड गिराए जा सकते हैं, वह बारिश और हवा दोनों रोकता है और सबसे सुरक्षित हल है — लेकिन वह पहले लगता है: सुबह लगना शुरू हुआ टेंट शाम की बारिश के लिए तैयार नहीं होता। खुला शामियाना और लकड़ी की छत सिर्फ़ धूप के लिए है, तेज़ बारिश में टपकती है। छतरी मेहमान को भीगने से बचाती है, फंक्शन को नहीं: मेन्यू कार्ड, खाने का काउंटर और साउंड सिस्टम खुले में ही रहते हैं।
नियम सीधा है: टेंट बैकअप प्लान नहीं, बैकअप प्लान का सामान है। मानसून में (जून से सितंबर) टेंट शुरू से लगवाइए। जोखिम कम हो तो किराये की बुकिंग ऑप्शन के साथ रखें और बुलाने का आख़िरी समय लिखवा लें।
फैसले का समय: कौन, कब
बैकअप प्लान को आम तौर पर मौसम नहीं, दुविधा गिराती है। दूल्हा-दुल्हन जितना टालते हैं, उतनी देर सब लोग दो अधूरे सेटअप के साथ इंतज़ार करते हैं। इसलिए फैसले का समय और फैसला लेने वाला पहले तय होता है।
नियम: फैसला वेन्यू कोऑर्डिनेटर या वेडिंग प्लानर लेता है, दूल्हा-दुल्हन नहीं; शिफ्टिंग में लगने वाले समय के डेढ़ गुना पहले लेता है; और एक बार लेने के बाद उसे पलटा नहीं जाता। शिफ्टिंग में 60 मिनट लगते हैं तो फैसला फंक्शन से 90 मिनट पहले होगा।
यह एक वाक्य शादी से एक हफ्ता पहले वेन्यू और सभी वेंडरों को लिखकर भेज दीजिए। फैसले का समय टाइमलाइन में अलग लाइन के तौर पर जोड़िए — हमारी शादी के दिन की टाइमलाइन में इसकी जगह तैयारी वाले ब्लॉक के आख़िर में है।
मेहमानों को खबर कैसे दें
जगह बदली है तो मेहमान को यह गेट पर पता नहीं चलना चाहिए। दो चैनल बनाइए: एंट्री पर दिशा बताने वाला बोर्ड और एक छोटा व्हाट्सऐप मैसेज। मैसेज पहले लिखकर ड्राफ्ट में रख लें; उस दिन किसी के पास लिखने का दिमाग नहीं होता। नमूना: "नमस्ते! बारिश के कारण कार्यक्रम कवर्ड हॉल में होगा। पता वही है, एंट्री पर दिशा-सूचक लगे हैं। समय नहीं बदला: शाम 7 बजे।" एंट्री पर परिवार के दो लोगों को रास्ता बताने के लिए खड़ा कीजिए — बोर्ड पढ़े बिना निकल जाने वाले मेहमान हमेशा अनुमान से ज़्यादा होते हैं।
एक बात और: बारिश में जूते और हेयरस्टाइल ख़राब होते हैं। एंट्री पर तौलिये और कुछ अतिरिक्त छतरियां सिर्फ़ सुविधा नहीं हैं — फोटो में सब कैसे दिखेंगे, यह भी वही तय करती हैं।
बारिश फोटो के लिए नुकसान नहीं है
बारिश वाली शादियों की सबसे ज़्यादा शेयर होने वाली तस्वीरें बारिश से ही निकलती हैं: पारदर्शी छतरी के नीचे गीले फ़र्श पर पड़ती रोशनी, शीशे पर बहता पानी, दरवाज़े की तरफ़ भागती भीड़। उन पलों में फोटोग्राफर दूल्हा-दुल्हन के साथ होता है — लेकिन उन्हीं मिनटों में भीगते हुए हंसते मेहमान, एक छतरी में खड़ी दो सहेलियां और गेट पर खिंच गई ग्रुप फोटो किसी की शॉट लिस्ट में नहीं होती। वे तस्वीरें मेहमानों के फोन में रहती हैं।
इसीलिए मौसम बिगड़े दिन मेहमानों की फोटो जमा करना और भी काम की चीज़ है: टाइमलाइन खिसकते ही फोटोग्राफर का कवरेज प्लान भी खिसकता है और ख़ाली मिनट बढ़ जाते हैं। टेबल और एंट्री पर लगा एक QR कोड उन मिनटों को एक ही एल्बम में जमा कर देता है। तस्वीरें काम लायक आएं इसके लिए मेहमानों को पहले फोन से शादी की फोटो लेने के टिप्स भेज दीजिए।
बारिश के अलावा दूसरे हालात
बैकअप प्लान सिर्फ़ बारिश के लिए न बनाइए। खुले फंक्शन को तीन चीज़ें और बिगाड़ती हैं:
- तेज़ गर्मी: छाया वाला हिस्सा, पानी का पॉइंट और फंक्शन एक घंटा आगे खिसकाने का विकल्प। मई-जून में दोपहर 12 से 4 सबसे मुश्किल समय है।
- तेज़ हवा: हल्की सजावट, खुली मोमबत्तियां और कागज़ के मेन्यू टिकते नहीं। वज़न वाले गुलदस्ते और बंद लालटेन बैकअप प्लान का सामान हैं।
- सर्दी और कोहरा: दिसंबर-जनवरी की शादियों में हीटर की संख्या मेहमानों की गिनती से तय होती है, और कोहरे में बारात की रफ़्तार आधी रह जाती है — पहुंचने का समय उसी हिसाब से रखें।
निष्कर्ष
बारिश का प्लान पूरी तैयारी की सबसे कम दिलचस्प और सबसे काम की लाइन है। तीन चीज़ें काफ़ी हैं: वैकल्पिक जगह और उसका खर्च कॉन्ट्रैक्ट में, फैसले का समय और फैसला लेने वाला लिखित में, मेहमानों का मैसेज ड्राफ्ट में तैयार। इन तीन के साथ बारिश दिन को एक घंटा खिसकाती है, बिगाड़ती नहीं। तैयारी पूरी हो गई हो तो आख़िरी काम तस्वीरें जमा करना है: दो मिनट में अपना इवेंट बनाइए और प्लान ए तथा प्लान बी की हर फोटो एक ही एल्बम में आ जाएगी।
